कबीर साहेब जी कहते है "मदिरा पीवै कडवा पानी,सतर जन्म श्वान के जानी" जिसका भावार्थ है कि एक बार शराब पीने से सतर जन्म के कुत्ते के होंगे तो फिर इस बुराई को क्यों पनपाया जा रहा है, दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में शराब के ठेके पर लगी लंबी लाईन और शौशल डिस्टेंस की उडती धज्जियाँ इससे ये पता चला की बुराई को रोकने के लिए सरकार कुछ नहीं कर सकती है, इस प्रकार की अनैतिकता ने एक बार फिर साबित किया कि बुराई पनपाने में कहीं ना कहीं सरकारे भी जिम्मेदार है, एक तरफ धार्मिक स्थलों पर रोक लगाकर सरकार ने ये साबित करने कि कोशिश की वो आमजनता की सुरक्षा को लेकर बेहतरीन तरीके से सजग है, मगर दिल्ली और अन्य राज्यों में शराब को लेकर इस तरह की घटनाओं से आम जनता में सरकार के प्रति रोष है, आखिर दौहरापन क्यों, एक तरफ भारत देश में धार्मिक माहौल बनाने के लिए रामायाण, महाभारत जैसे सिरियल से एकता और नैतिकता का संदेश दिया जाता है, मगर वही इसके विपरीत शराब की बिक्री शुरू करना, देश की जनता को दो तराजू में तौलने के जैसा है, जो हरगिज़ बर्दाश्त करने योग्य नहीं है, मगर सिक्के का ये भ...