कबीर साहेब जी कहते है
"मदिरा पीवै कडवा पानी,सतर जन्म श्वान के जानी"
जिसका भावार्थ है कि एक बार शराब पीने से सतर जन्म के कुत्ते के होंगे तो फिर इस बुराई को क्यों पनपाया जा रहा है,
दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में
शराब के ठेके पर लगी लंबी लाईन और शौशल डिस्टेंस की उडती धज्जियाँ इससे ये पता चला की बुराई को रोकने के लिए सरकार कुछ नहीं कर सकती है, इस प्रकार की अनैतिकता ने एक बार फिर साबित किया कि बुराई पनपाने में कहीं ना कहीं सरकारे भी जिम्मेदार है, एक तरफ धार्मिक स्थलों पर रोक लगाकर सरकार ने ये साबित करने कि कोशिश की वो आमजनता की सुरक्षा को लेकर बेहतरीन तरीके से सजग है, मगर दिल्ली और अन्य राज्यों में शराब को लेकर इस तरह की घटनाओं से आम जनता में सरकार के प्रति रोष है,
आखिर दौहरापन क्यों,
एक तरफ भारत देश में धार्मिक माहौल बनाने के लिए रामायाण, महाभारत जैसे सिरियल से एकता और नैतिकता का संदेश दिया जाता है, मगर वही इसके विपरीत शराब की बिक्री शुरू करना, देश की जनता को दो तराजू में तौलने के जैसा है, जो हरगिज़ बर्दाश्त करने योग्य नहीं है, मगर सिक्के का ये भी पहलू है कि,सरकारे ऐसी दौहरी राजनीति करती आई है, मगर अब संभलने की जरूरत है, परंतु,
पुरानी कहावत है कि, अंधेर नगरी चौपट राजा, शायद आज के इस गंभीर हालत में ये बात कहे तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी, गौरतलब है कि कोरोना वायरस की महामारी के भयानक दौर में राज्य की सरकारों ने धार्मिक स्थलों पर अनिश्चित कालीन रोक लगा रखी है, वही इसके विपरीत कुछ इलाकों में शराब की बिक्री शुरू करवाकर आमजन की भावनाओं को आहत करके बेवडो से वाह वाही लूट ली है, आखिर इससे क्या फायदा होगा, बुराई बढेगी, तो अपराध को बढावा मिलेगा जिससे देश में घरेलू हिंसा भी बढेगी, क्या इससे अर्थव्यवस्था में सुधार हो जाऐगा, कितने परिवारों की शांति छिन जाऐगी, ये तो उस घर के सदस्य ही जानते हैं, जिनके परिवार में कोई शराब पीकर उत्पाद मचाता है, बहरहाल, सरकार की इस दौहरी और निम्न स्तर की रणनीति से आम जनता के साथ अन्याय हो रहा है , जिसे जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और ये बात स्वाभाविक भी है, क्योंकि बडी मुश्किल से इस प्रकार की बुराई से छुटकारा मिल रहा था, चाहे वो लाॅकडाउन के बहाने से ही हो
मगर, इस तरह के मंसूबे कुछ और ही बंया करते हैं,
कुछ रसूखदार लोगों की वजह से आम आदमी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना नाइंसाफी है, लिहाजा,
सरकार को चाहिए कि इस प्रकार की बुराई को रोके,ताकि वर्तमान में जो हालात हैं उस पर काबू पाया जाऐ,अन्यथा, सरकार जवाबदेही तय करे कि
शराब के कारण अगर हालात बिगडते है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, गहन विचारों के साथ सरकार को मनन करने की जरूरत है, ताकि ऐसे समय में देश को अखंडता के सूत्र में बांधा जा सके!
इससे निजात वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जी के तत्व ज्ञान से स्वभाविक रूप से हो रहा है क्योंकि उनके शब्द में वह शक्ति है जिससे जितना भी इंसान बुरा क्यों ना हो वह समस्त बुराइयों को त्याग कर अपना जीवन बदल ले सकता है यह तभी संभव है जब संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान सुना जाए और उसका अनुसरण किया जाए
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