सुख में जीवन हमें सत भक्ति से प्राप्त होगा
ऋषि मुनियों की तपोस्थली कहलाने वाली पावन धरा पर भक्ति प्रारंभ से ही रही है तभी तो इसे सोने की चिड़िया कहते हैं युगों युगों से चली आ रही विविधता से भरी हुई इस संस्कृति में कहीं ना कहीं भगवान के गुण इस में समाए हुए हैं
वर्तमान में हम देखते हैं कि कोई भी प्राणी सुखी नहीं है कारण यह है कि हम उस भक्ति मार्ग से भटक चुके हैं जहां से हमें सुख प्राप्त होता है वह भक्ति मार्ग क्या है और हमें कैसे मिले इसके लिए हमारे जो शास्त्र हैं उनमें हमें खोज करनी होगी
अब सवाल उठता है कि हमारे समाज में जो हमारे धर्म में जो शास्त्र हैं उनको हम कैसे खोजें तो उन शास्त्रों को बहुत ही बारीकी से और संक्षेप रूप से हमें प्राप्त हो सकते हैं उसके लिए हमें एक पुस्तक है जो कि बहुत ही अनमोल है उसे हमें पढ़ना होगा ।
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